ॐ नमः शिवाय, ॐ एकादश रुद्राय

मिथिलाचंल केर हृदय स्थल ग्राम मंगरौनी । आ मंगरौनी के हृदय स्थल में छथि महादेव के अलौकिक मंदिर । जी हां हम गप्प कर रहल छि बाबा एकादश रूद्र महादेव के ।

श्री श्री 1108 एकादश रूद्र महादेव के ई दुलर्भ आ अद्भुत मंदिर अछि जे मधुबनी सS मात्र तीन किलोमीटर दूर मंगरौनी ग्राम में स्थित अछि । ई मंदिर केर पुजारी बाबा आत्माराम के मुताबिक मंदिर के स्थापना प्रसिद्ध तांत्रिक मुनीश्वर झा सन् 1953 ई0 में केने रहथिन्ह ।

मंदिर में प्रवेश करअ सS सभ सS पहिले मां दुर्गा के सवारी सिंह व भोला बाबा के सवारी बसहाक दर्शन प्राप्त होएत अछि । मंदिर के प्रवेश द्वार आ सीढ़ी केर बीच ई दूनू प्रतिमा के विराजमान कएल गेल अछि । इनकर दर्शन कएला बाद श्री गणेश के दर्शन होएत अछि ।  मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार आ निकास द्वार केर बीच में श्री गणेशक प्रतिमा स्थापित कएल गएल अछि। ई मंदिर में स्थापित सभ 11 टा शिवलिंग कारि ग्रेनाइट पत्थर सS बनल अछि जे लगभग दू सौ बरख पुरान छय ।    

एकादश रुद्र महादेव के एकटा अलग महत्व अछि । हिनकर महत्व ई द्वारे से हो  बढ़ि जाएत छय कियाक एतय एक संगे शिव के विभिन्न रूपक 11टा शिवलिंग के दर्शन आ पूजन कएल जाएत अछि । एतय महादेव केर 11टा रूप में महादेव, शिव, रुद्र, शंकर, नील लोहित, ईशान, विजय, भीम देवदेवा, भदोद्भव आ कपालिश्च केर दर्शनक सौभाग्य भेटय छय । जे सभ शिवलिंग पर उकेरल अछि ।

बाबा आत्माराम के मानल जाए त एतय एके शक्ति-वेदी पर स्थापित शिव के सभ एकादश रुद्र लिंग रूप में 10 मई स 21 मई 2000 ई. केर बीच अलग अलग  आकृति उभइर कS आएल छल । जेकर एखनों बनवाक काज जारी अछि । ई एकटा दिव्य आ अलौकिक घटना छल ।  

मंदिरक शिवलिंग में उबरल चित्र के क्रम वार जानकारी बाबा आत्माराम के अनुसार-

1 महादेव – 30 जुलाई 2001 के अर्धनारीश्वर केर रूप प्रकट भेलाह । कामाख्या माई के ई भव्य रूप अछि ।पांचम सोमवारी के दिन गणेश जी गर्भ में प्रकट भेलाह । शिवलिंग पर ई रूप, स्पष्ट नजर आबि छय़।
2 शिव: – प्रभु श्री राम कहने छलाह की हमही शिव छी । अहि लिंग में सिंहासनक चित्र उभरल अछि, जे प्रभु श्रीराम के सिंहासन दर्शा रहल अछि।

3 रुद्र: – भय के हरय वला अहि लिंग में बजरंगवली के पहाड़ लS कS उड़ैत बडड अद्भुत चित्र प्रकट भेल अछि।

4 शंकर: – गीता के दशम अध्याय में श्रीकृष्ण कहलखिन्ह की हमही शंकर छी। एहि लिंग में श्रीकृष्ण केर सुदर्शन चक्र, बांसुरी आ बाजुबंध स्पष्ट दृष्टिगोचर होएत अछि।

5 नील लोहित:-जखन महादेव विषपान केने छलाह, तखन हुनकर नाम नीललोहित: पड़ल छलाह । अहि लिंग में सांप आ ऊँ प्रकट भेल अछि ।

6 ईशान: – हिमालय पर निवास करअ वला महादेव जिनका केदारनाथ कहल जाएत अछि । नौ जुलाई 2001 सावनक पहिल सोमवारी के राजराजेश्वरी केर रूप प्रकट भेल छलाह। आ पांचमुखी शिवलिंग से हो प्रकट भेल छल। एकर अलावा ओमकार आ महाकालक गदा सेहो देखल जा सकएत अछि ।
7 विजय: – ई शिवलिंग में एखन छवि बन रहल अछि जे कारण स आकृति अभी स्पष्ट नय छय।

8 भीम: – महादेवक एक टा रूप भीम सेहो अछि। एहि शिवलिंग में गदा केर छवि सामने आयल अछि। गदा के डंडा एखन प्रकट भS रहल अछि।
9 देवादेव: –ई लिंग सूर्यक स्वरूप छथि । एहि शिवलिंग में लिंग के निचला दुनु भाग में सूर्यक किरण फुटि कS शीर्ष में मिल रहल अछि। संगहि त्रिशूलक चित्र सेहो देखाइत अछि ।
10 भवोद्भाव: –एहि लिंग में उमा-शंकर कs आकृति प्रकट भेल अछि। जे धीरे धीरे बढ़ि रहल अयछ ।
11 कपालिश्च:- महादेव के एकटा रूप बजरंगबली से हो अछि। बाबा आत्माराम के कहनाम अछि कि बजरंगबली ब्रह्मचारी रहलाह ,तय द्वारे संभवतः इ लिंग में कोनो चित्र नय उभएर रहल छय। कोनों दिन ई पूरा लाल भs जाएत ।

हिनकर सभ सोमवारी सांझ केर दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, चंदन आदि सं स्नान आ विशेष श्रृंगार कएल जाएत अछि।  

बाबा आत्माराम के मुताबिक महादेवक मूल मंत्र  ॐ नमः शिवाय छैन्ह, मुदा तांत्रिक पंडित मुनीश्वर झा ( 1896-1986) एहि पांच टा अक्षर केर स्थान पर ग्यारह अक्षरक मंत्र तैयार केलखिन्ह –  ॐ नमः शिवायॐ एकादश रुद्राय । इ मंत्र के 100 बेर जाप करए सs 1200 जापक फल भेटएत छय कियाक 100 बेर ॐ नमः शिवाय आ 1100 बेर एक संगे ॐ एकादश रुद्राय के जाप सं अर्थात कुल 1200 बेर जाप भs जाएत अछि ।

लोक मान्यता अछि कि महादेव के होव वला आरती के श्रवण कएला सs भक्त के कष्ट दूर होएत छैन । दूर-दूर सs जे भक्त एतय आबैत छैथ से खाली हाथ नय जाएत छथि । महादेव हुनका पर अप्पन कृपा जरूर करय छथिन्ह । आ हुनकर मनोकामना पूरा करएत छथिन्ह।  

मंदिर केर दाया तरफ ग्रेनाइट आ अष्टधातु स बनल राधेश्याम मंदिर अछि । जेकरा में विष्णु के दशावतार विराजमान छथि ।

श्री विद्या यंत्र से हो छथि जेकर दर्शन आ पूजन सs लक्ष्मी आ सरस्वती दूनू केर कृपा भेटएत अछि । यंत्रक दर्शन दुर्लभ मानल गएल अछि ।  

मंदिर के सामने विशाल पवित्र सरोवर अछि । ओतय विष्णु पद गया क्षेत्र छय । एहन मान्यता छय कि जे व्यक्ति अपन पितर पिंडदान करय गया नय जा सकएय छैथ, हुनका पितर के एतय पिंडदान करय स मुक्ति भेटय अछि ।

मंदिर केर संस्थापक तांत्रिक मुनीश्वर झाक समाधि स्थल एतय अछि ।

परिसर में महाकाल केर मंदिर से हो अछि ।  ओकर बगल में पीपरक विशाल वृक्ष छय। एहन लोक मान्यता अछि जे ई पीपरक वृक्ष के स्पर्श मात्र स भूत प्रेत केर प्रभाव स लोग सभ के मुक्ति भेटय छय़ ।

महादेव मंदिर में भगवान शिव पार्वतीक एकटा दुर्लभ मूर्ति सेहो प्रतिष्ठित अछि, जाहि में महादेवक बाया जांघ पर पार्वती बैसल छथि। महादेव क बामा हाथ पार्वती के डाँड़ पर अछि आ दाहिना हाथ हुनक ओष्ठ पर अछि । एहि मूर्ति केर बाम दिस बसहा आ बगल में महाकाली, महालक्ष्मी , महासरस्वती यन्त्र आ विष्णु पादुका अछि ।

संगे संग आम आ महुआ केर अद्भुत आलिंगन-वद्ध वृक्ष से हो एतय स्थित अछि । जेकर मिथिला में बडड्  महत्व अछि । मिथिला में विवाह के पूर्व वर-वधू केर दीर्घायु खातिर आम-महुआ के एके संग पूजन के विधान अछि । ब्याह के बाद दांपत्य जीवन सुखमय, आयु में समानता होवअ द्वारे पति पत्नी दूनू संगे प्रदक्षिणा करल जाएत अछि । मंदिर परिसरक आम-महुआ वृक्ष केर आलिंगन बद्ध स्वरूप दुर्लभ मानल गएल अछि। कियाकि एतय तीन- तीन जगह आम-महुआ वृक्ष आलिंगन-बद्ध अछि।  

ओना त एतय सभ दिन पूजा अर्चना कएल जाएत अछि । मुदा सोमवारी दिन एतुका पूजा केर विशेष महत्व अछि । ई दिन अहिठाम भंडारा केर आयोजन होएत अछि। सोमवारी दिन लिंग के विशेष श्रृंगार कएल जाएत अछि । लोक मान्यता अछि जे ई दिन एतय रुद्राभिषेक एंव षोडषोपचार पूजन करअ सs हुनकर मनोकामना अवश्य पूर्ण होइत छन्हि। बाकी सावन माह में एकादश रुद्र केर पूजनक एकटा अलग महत्व मानल जाएत अछि ।  

मंदिर केना आबि  

श्री श्री 1108 एकादश रूद्र महादेव मंदिर आबएला मधुबनी जिला मुख्यालय सs रिक्शा ऑटो , टैक्सी आदि के नीक सुविधा उपलब्ध अछि । जिला मुख्यालय सs सटल 3 किमी दूरी पर मंगरौनी गांव में कुटी चौक पर मंदिर स्थित अछि ।  मधुबनी आबए खातिर बस आ रेलवे के बडड नीक सुविधा अछि । निकटतम रेलवे स्टेशन मुधबनी अछि । जतय सs सवारी वाहन सs अहां लोकनि मंगरौनी पहुंच सकय छि । ओतय नजदीक एयरपोर्ट पटना अछि । पटना से मधुबनी बस सुविधा नीक अछि । रात्रि विश्राम खातिर जिला मुख्यालय मधुबनी में उत्तम होटल अछि ।

बेशी जानकारी लेव खातिर श्री श्री 1108 एकादश रूद्र महादेव मंदिर वेबसाइट से हो देखल जा सकैयाह ।

www.ekadashrudra.org